Saturday, December 08, 2007

मै और कोई

एक सोच हूँ मै

खाली एक सोच


एक़ संपूर्ण सोच हो जाने की चाह में


अधूरेपन से जूझते जूझते

थक जाने पर


हाथ बढा कर माँग लेने से

या हाथ बढा कर छीन लेने पर


आइना दिखा देता है

और कोई


अचानक


प्रेम की प्रतिमूर्ति कह कर

पूर्णता का आभास करा देता है

और कोई