दुष्ट राक्षस की सफेद परी
वो तो गये
अकेला कौन?
तुम परी रहो या बनो बुरी
लल्लू चाचा की थीं तुम धुरी
तुम जाओगी तो तुम्हें भी
यूं ही याद करेंगे
तुम्हें हमने उसकी नज़र से देखा
अब अपनी आँखें खोलेंगे
तुम्हें
तुम्हारे तराजू पर ही तौलेंगे
हमारा साथ दोगी निर्मला जी
नन्ही, मैडम और अम्मा जी
तुम हमारा ध्यान रखना
हम तुम्हें प्यार करेंगे
लेन देन का रिवाज है
यही सभ्य समाज है
स्मिता चौधरी
अकेला कौन?
तुम परी रहो या बनो बुरी
लल्लू चाचा की थीं तुम धुरी
तुम जाओगी तो तुम्हें भी
यूं ही याद करेंगे
तुम्हें हमने उसकी नज़र से देखा
अब अपनी आँखें खोलेंगे
तुम्हें
तुम्हारे तराजू पर ही तौलेंगे
हमारा साथ दोगी निर्मला जी
नन्ही, मैडम और अम्मा जी
तुम हमारा ध्यान रखना
हम तुम्हें प्यार करेंगे
लेन देन का रिवाज है
यही सभ्य समाज है
स्मिता चौधरी
