Friday, May 19, 2006

दुष्ट राक्षस की सफेद परी

वो तो गये
अकेला कौन?

तुम परी रहो या बनो बुरी
लल्लू चाचा की थीं तुम धुरी
तुम जाओगी तो तुम्हें भी
यूं ही याद करेंगे

तुम्हें हमने उसकी नज़र से देखा
अब अपनी आँखें खोलेंगे
तुम्हें
तुम्हारे तराजू पर ही तौलेंगे


हमारा साथ दोगी निर्मला जी
नन्ही, मैडम और अम्मा जी
तुम हमारा ध्यान रखना
हम तुम्हें प्यार करेंगे

लेन देन का रिवाज है
यही सभ्य समाज है



स्मिता चौधरी

Thursday, May 11, 2006

विगत राग की रागिनी

विगत राग की रागिनी है ये जीवन
मन्द्र मधय तार
आरोह अवरोह सभी है,
कैसे झंकार हो तारों से
जब कोमल और तीव्र
बेसुरे लगते हो?
जीवन मे रिशभ है
तो धैवत भी है
गन्धार है तो निशाद भी है
कोमल और तीव्र के झगडे मे
सरगम अधूरी है.
मैने संगीत साधना की
ध्रुपद और खयाल दोनो ही गाये
पर जीवन मे तराना न ला सकी
किसको दोष दू
स्वरोंको या रागों को?
लगता है जीवन का संगीत
शायद अधूरा ही रहेगा.
. सुजला मुटाटकर

Tuesday, May 09, 2006

सावन गीत

हम कबहुं न जाएंगे अम्मा के

नाती को दीनी पूरी
बलम को दीने रोट
हमका दे दिये सूखे ठीकरा
हो, हम कबहुं न जाएंगे अम्मा के

पोती को दीनी पायल
बहू को दीने कँगना
हमका दे दिये धक्के चार
हो, हम कबहुं न जाएंगे अम्मा के

बँधुआ हमरे बाबुल
और सेवक हमरे भाई
हमरी खो गईं गुइयाँ ब्याह के
हम कबहुं न जाएंगे अम्मा के

राम नाम सत्य हो

हे भगवान
लडकी पैदा न होने पाये
इंसान ज़रूर जाँच कराये
लडकी गर्भ में ही मार दी जाये

बाकी के सारे अरमान पूरे कर चुकी
ये हसरत अधूरी न रह जाये

मस्तिष्क का व्यापार करके वेश्या मै बन चुकी
घरों को तोडने वाले
तू हृदय से भिखारी बन जाये
गाली तो मै दे चुकी
अब श्राप देती हूं
तुझे बडी उमर लग जाये
तू अपनी जी चुका
तुझे मेरी उमर लग जाये

तूने मेरा हर सपना तोडा
तुझे मै माफ़ करती हूं
जीते जी तेरा श्राद्ध मैं करती हूं
भगवान से मुझे
जीवन ही में मोक्ष मिल जाये

जिनके सपने खो गये हैं
मेरे सपने उनके हो जाएं