Sunday, February 26, 2006

काला सूरज

मेरे परिवार के प्रथम कवि, श्री जीतेन्द्र कुमार को समर्पित

पहला मानव जो खड़ा हुआ,
अंतिम मानव जो खड़ा रहा
यह सूरज उनका सूरज है
यह सूरज अस्त नहीं होगा!

निर्विघ्नम कुरु में देव का
नारा जिसने जपा नहीं,
यह सूरज उसका सूरज है
यह सूरज अस्त नहीं होगा!

जो वस्त्रहीन, निर्लज्ज, प्रबल,
बस मोक्ष मार्ग पर डटा रहा
यह सूरज उसका सूरज है
यह सूरज अस्त नहीं होगा

जो निर्मम जीवन जीते हैं,
और क्रोधित मृत्यु मरते हैं
यह सूरज उनका सूरज है
यह सूरज अस्त नहीं होगा!

पृथ्वी का सूरज स्वर्णिम है,
स्वर्णिम सूरज बुझ जाते हैं
यह सूरज काला सूरज है
यह सूरज अस्त नहीं होगा!


-अर्जुन